Saturday, 5 November 2016

धरती पर चाँद



वह हंसी तो ऐसा लगा जैसे धरती पर चाँद का नूर उतर आया है

सोचते सोचते ही बीत गयी सारी रात कि


धरती पर नूर या चाँद खुद तशरीफ़ ले  आया  है


                                        HIMANSHU KAYASTH

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